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असुरक्षित ऋण क्या होते हैं? भारतीय बैंकिंग संकट, अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और RBI के समाधान की एक विस्तृत विवेचना करो।

Drafting और Structuring the Blog Post Title: "असुरक्षित ऋण: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, और RBI की भूमिका" Structure: परिचय असुरक्षित ऋण का मतलब और यह क्यों महत्वपूर्ण है। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में असुरक्षित ऋणों का वर्तमान परिदृश्य। असुरक्षित ऋणों के बढ़ने के कारण आसान कर्ज नीति। उधारकर्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल का सही मूल्यांकन न होना। आर्थिक मंदी और बाहरी कारक। बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव वित्तीय स्थिरता को खतरा। बैंकों की लाभप्रदता में गिरावट। अन्य उधारकर्ताओं को कर्ज मिलने में कठिनाई। व्यापक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव आर्थिक विकास में बाधा। निवेश में कमी। रोजगार और व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका और समाधान सख्त नियामक नीतियां। उधार देने के मानकों को सुधारना। डूबत ऋण प्रबंधन (NPA) के लिए विशेष उपाय। डिजिटल और तकनीकी साधनों का उपयोग। उदाहरण और केस स्टडी भारतीय बैंकिंग संकट 2015-2020। YES बैंक और IL&FS के मामले। निष्कर्ष पाठकों के लिए सुझाव और RBI की जिम्मेदारी। B...

मानव अधिकारों के संन्दर्भ में वियना घोषणा तथा कार्यवाही का कार्यक्रम (Vienna declaration an programme of action in human rights .)

वियना घोषणा  तथा कार्यवाही का कार्यक्रम (Vienna declaration and program of action ): मानव अधिकारों पर विश्व स्तरीय सम्मेलन ऑस्ट्रिया के वियाना शहर में 14 से 25 जून 1993 को संपन्न हुआ। इस सम्मेलन  में 171 देशों के करीब 7000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त इसमें अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की इकाई तथा गैर सरकारी संगठनों ने भी हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य 1948 को मानव अधिकारों की सार्वजनिक घोषणा के क्षेत्र में प्रगति तथा पुनर्विलोकन पर विचार करना था। इस सम्मेलन में आर्थिक सांस्कृतिक सिविल तथा राजनैतिक अधिकारों के उपभोग तथा विकास के संबंध में भी विचार किया गया ।

            इससे पूर्व 3 क्षेत्रीय सम्मेलन(ट्यूनिसिया), सैन जाॅस(कास्टारिया) तथा बैंकॉक( थाईलैंड)में भी संपन्न हुए थे। इन पर भी वियाना सम्मेलन में विचार किया गया। दिनांक 25 जून 1993 को सम्मेलन द्वारा वियाना घोषणा  तथा कार्यवाही के कार्यक्रम को अंगीकृत(Adopted) कर लिया गया जिसे संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने भी प्रस्तावित किया। वियाना घोषणा की महासभा को सिफारिश की गई कि मानव अधिकारों के प्रवर्तन एवं संरक्षण के लिए उच्चायुक्त (High Commissioner) की स्थापना की जानी चाहिए। इसे दिसंबर 1993 में स्वीकार किया गया।


       वियना घोषणा के महत्वपूर्ण भागों को यहां संक्षेप में प्रस्तुत किया जा रहा है



                     भाग 1



(1) संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के संदर्भ में विश्व सम्मेलन मानवाधिकारों पर प्रतिज्ञान(affirm) करता है कि सार्वजनिक रूप से मानव अधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता ओं का अवलोकन तथा संरक्षण किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी। मानव अधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रतायें सभी व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है, इनका संरक्षण एवं प्रवर्तन सरकार की प्रथम जिम्मेदारी है।


(2) सभी व्यक्ति आत्म निर्धारण का अधिकार रखते हैं। वे स्वतंत्रता पूर्वक अपनी राजनीतिक स्थिति का निर्धारण कर सकते हैं तथा अपना आर्थिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास कर सकते हैं।


            मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि आत्म निर्धारण के अधिकार का उल्लंघन मानव अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।


(3) सभी मानवीय अधिकार सार्वजनिक तथा अंतर्संबंधित हैं। अन्तर्राष्ट्रीय  समुदाय को समान रूप से मानव अधिकारों को लागू किया जाना चाहिए। राज्यों का यह कर्तव्य है कि वह अपनी राजनैतिक आर्थिक तथा सांस्कृतिक प्रणाली में समस्त मानव अधिकारों व मौलिक स्वतंत्रता ओं को संरक्षित व प्रवर्तित करें।


(4) लोकतंत्र(Democracy) व्यक्तियों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति तथा उनके राजनैतिक आर्थिक सामाजिक व सांस्कृतिक आत्म निर्धारण पर निर्भर करता है। मानव अधिकारों व मौलिक स्वतंत्रतायें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक तथा शर्त रहित होनी चाहिए।



(5) मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन स्वीकार करता है कि विकसित देशों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लोकतंत्रात्मक एवं आर्थिक विकास के संबंध में समर्थन दिया जाना चाहिए।


(6) मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि विकास का अधिकार सार्वजनिक एवं असंक्रमणीय अधिकारों के रूप में विकसित होना चाहिए और इसे मौलिक मानवाधिकारों का महत्वपूर्ण भाग माना जाना चाहिए।



(7) विकास का अधिकार(Rights to development) वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के लिए आवश्यक विकासशील एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं के संदर्भ में पूर्ण होना चाहिए। विश्व सम्मेलन अवैध रूप से घातक तथा मादक पदार्थ जो मानव जीवन व स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है के विरुद्ध कार्य करने की स्वीकृति देता है।


         प्रत्येक मानव को वैज्ञानिक प्रगति और इनके अनुप्रयोग का लाभ उठाने का अधिकार है। विश्व सम्मेलन जीवन चिकित्सा जीवन विज्ञान तकनीकी आदि को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सभी के लिए उपयोग किए जाने के लिए प्रयास करने के लिए स्वीकृत  देता है।


(8) विश्व सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आवाहन करता है कि वह विकसित देशों का अधिकाधिक सहायता व ऋण सहायता उपलब्ध कराएं जिससे कि वे अपने देश के नागरिकों को आर्थिक सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बना सकें।


(9) किसी भी प्रकार का अंतर किए बिना मानवीय अधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता ओं का सम्मान अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार विधि का एक मौलिक नियम है। सरकारों को इसका ध्यान रखना चाहिए।


(10) अंतर्राष्ट्रीय समुदायों को बढ़ते आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

(11) महिलाओं तथा बच्चियों के मानव अधिकार सार्वजनिक मानवाधिकार का असंक्रमणीय एवं महत्वपूर्ण भाग है। महिलाओं को समान एवं पूर्ण रूप से राजनीतिक सिविल क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर से सहयोग दिया जाना चाहिए उसमें कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं के लैंगिक शोषण को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।


(12) अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों के मानव अधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रताओं को प्रभावी ढंग से बिना किसी भेदभाव के प्रदान किया जाना चाहिए और विधि के समक्ष समता को भी इनके लिए लागू किया जाना चाहिए। अल्पसंख्यकों को भी अपनी संस्कृति धर्म भाषा का स्वतंत्रता पूर्वक एवं बिना किसी हस्तक्षेप या भेदभाव के उपभोग करने का अधिकार प्राप्त हो।


(3) राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज के समस्त क्रियाकलापों में स्वदेशी नागरिक पूर्ण व स्वतंत्र रूप से सहयोग दें। स्वदेशी नागरिकों के अधिकारों के प्रवर्तन व संरक्षण को भी महत्व दिया जाना चाहिए।


(14) अयोग्य व्यक्तियों(disabled persons ) के मानवीय अधिकारों व स्वतंत्रताओं को संरक्षित करने तथा समाज के क्रियाकलापों में उन्हें भी समान अवसर दिए जाने हेतु विशेष ध्यान दिया जायेगा ।


(15) विश्व सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को बगैर किसी भेदभाव के अभियोजन के विरुद्ध दूसरे देशों में शरण पाने तथा अपने देश में वापस लौटने का अधिकार दिया जाएगा।


(16) प्रवासी श्रमिकों के मानव अधिकारों के संरक्षण एवं प्रवर्तन के लिए विशेष महत्व दिया जाएगा।


(17) राज्यों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे गरीब जनता के मानव अधिकारों की रक्षा करें तथा उनके लिए उक्त जीवन स्तर उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित रहें।


(18) युद्ध की परिस्थितियों में महिलाओं के साथ दुराचार तथा मानव अधिकारों का उल्लंघन रोका जाए तथा ऐसे अपराधियों को दंडित किया जाए।


(19) विश्व सम्मेलन इस मत का है कि विश्व के अधिकांश देशों में मानव अधिकारों का निरंतर उल्लंघन हो रहा है, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों के संदर्भ में पीड़ितों को इस उल्लंघन के विरुद्ध तुरंत एवं पर्याप्त उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।


(20) सभी व्यक्तियों को मानव अधिकार व अन्य स्वतंत्रता ओं का उपयोग स्वतंत्रता पूर्वक करने का अधिकार है। मनमाने ढंग से निरुद्ध सभी प्रकार का जातिवाद अमानवीय व अत्याचारपूर्ण उपचार व दंड गरीबी बेकारी धार्मिक हिंसा आतंकवाद महिलाओं के विरुद्ध अपराध आदि को रोकने के लिए व्यापक प्रयास करने की आवश्यकता है।


(21) मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन राज्यों को आवाहन करता है कि वे अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा संयुक्त राष्ट्र के चार्टर मानव अधिकारों की सालगिरह घोषणा के अंतर्गत प्रत्येक  को अच्छे जीवन स्तर स्वास्थ्य , भोजन ,चिकित्सा ,सहायता भवन तथा आवश्यक सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराएं।


(22) विश्व सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि राष्ट्रीय स्वाद के लिए कर्तव्य बनता है कि वे मानव अधिकारों से संबंधित समस्त घोषणाएं सम्मेलनों व अन्य संस्थाओं की सिफारिशों को स्वीकार करें। मानव अधिकार शिक्षा कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाएं।



(23) राष्ट्रीय संस्थाओं की मानव अधिकारों के प्रवर्तन व संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन संस्थाओं को चाहिए कि वह प्रत्येक राज्य में मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु कार्य करें।




भाग 2


(1) मानव अधिकारों के क्षेत्र में विश्व स्तरीय कार्यक्रमों एवं अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के प्रदायिक उद्देश्यों में जातीय भेदभाव पर अंकुश लगाना चाहिए।


(2) सभी सरकारों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे जातीयता की बुराई को दूर करने के लिए आवश्यक दंड प्रावधान करेंगे।


(3) विश्व सम्मेलन समस्त सरकारों का आवाहन करता है कि वे धार्मिक हिंसा भेदभाव या अन्य हिंसा के विरुद्ध न्यायिक तंत्र को सुदृढ़ बनाएं। प्रत्येक व्यक्ति को विचारों अभिव्यक्ति एवं धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की जाए।


(4) मानव अधिकारों का उल्लंघन करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आपराधिक अपकृत्य के लिए उत्तरदाई होगा।


(5) विश्व सम्मेलन समस्त राष्ट्रों का आवाहन करता है कि वे व्यक्तिगत रूप से तथा सामूहिक रूप से तुरंत न्याय दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हो।


(6) विश्व सम्मेलन राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आवाहन करता है कि वह व्यक्तियों को राष्ट्रीय नैतिक धार्मिक एवं अल्पसंख्यक अधिकारों का प्रवर्तन एवं संरक्षण करें।


(7) समाज के राजनीतिक आर्थिक सामाजिक धार्मिक व सांस्कृतिक विकास हेतु आवश्यक सहयोग एवं मानक निर्धारित किए जाएं।


(8) समाज के गरीब एवं असहाय व्यक्तियों को निशुल्क एवं पूर्ण सहयोग दिए जाने के लिए राज्य आगे आएं।


(9) विश्व सम्मेलन राज्यों का आवाहन करता है कि वे प्रवासी श्रमिकों तथा उनके परिवारों के मानव अधिकारों की रक्षा करने की गारंटी दे।
(10) मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन यह अपेक्षा करता है कि राज्य प्रवासी श्रमिकों में सहनशीलता की शांति एवं संवर्धन की भावना उत्पन्न करने के लिए प्रयासरत रहें।



(11) सम्मेलन राष्ट्रों का आवाहन करता है कि वे अपने राष्ट्रीय कार्य योजना के अंतर्गत बच्चों के अधिकारों को भी शामिल करें। तो क्या उत्तम पोषण स्वास्थ्य प्राथमिक शिक्षा शुद्ध पेयजल आदि के लिए आवश्यक प्रबंध करें।


(12) विश्व सम्मेलन राष्ट्रों से अपील करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बच्चों की कठिनाइयों व समस्याओं के निस्तारण में सहयोग करें। बच्चों के उत्पीड़न बाल श्रम बच्चों के विक्रय बच्चों के साथ वेश्यावृत्ति को प्रतिबंधित करें।




(13) लड़कियों के मानव अधिकारों के प्रवर्तन एवं संरक्षण को प्रभावी ढंग से निश्चित करने तथा लड़कियों के साथ भेदभाव की प्रथा को समाप्त करने के लिए राज्य प्रयास करें।


(14) विश्व सम्मेलन इसके लिए समर्पित है कि युद्ध क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित की जाए। युद्ध के बाद बच्चों की देखभाल एवं सुधार के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं।



(15) मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु जानबूझकर अवहेलना करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाने के लिए विधायी न्याय तथा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा दोषी व्यक्तियों को दंडित किया जाए।


(16) अयोग्य एवं अक्षम व्यक्तियों को कल्याण शिक्षा सुरक्षा कार्य तथा स्वतंत्र जीवन उपलब्ध कराने और सामाजिक गतिविधियों में उसकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्र दृढ़ संकल्पित होंगे। अयोग्य व्यक्तियों के मानव अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।


(17) अयोग्य व्यक्तियों के लिए समाज में सामान्य व्यक्तियों की तरह समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए आवश्यक विधिक प्रावधान भी किए जा सकेंगे।


(18) मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन अपेक्षा करता है कि मानव अधिकार शिक्षा प्रशिक्षण तथा लोक सूचनाएं आवश्यक रूप से प्रवर्तित की जाएंगी।


(19) विश्व सम्मेलन राष्ट्रों से यह अपेक्षा करता है कि वे मानव अधिकारों को तथा इससे संबंधित प्रावधानों व नियमों को औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा संस्थाओं के विषय के रूप में शामिल करें।


(20) मानव अधिकार शिक्षा में शांति लोकतंत्र सामाजिक न्याय अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मानव अधिकार संस्थाएं भी शामिल की जानी चाहिए।

(21) महिलाओं के लिए मानव अधिकारों की आवश्यकता, शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सुनिश्चित  करने  के लिये विश्व कार्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध किए जाने चाहिए।


(22) अंतर्राष्ट्रीय संगठनों राष्ट्रीय संगठन तथा गैर सरकारी संगठनों कीसहायता से सरकारें मानव अधिकारों के प्रवर्तन तथा संरक्षण के प्रति जनता में जागृत करेंगी तथा समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण संरक्षण एवं विकास के लिए कार्य करेंगे

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